Land Registry New Rule 2026: भारतीय संपत्ति बाजार में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सरकार भूमि पंजीकरण प्रणाली में धीरे-धीरे सुधार कर रही है। रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 को बदलने के लिए रजिस्ट्रेशन बिल 2025 लाया गया है, जो दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने का प्रयास है। हालांकि यह परिवर्तन तुरंत पूरे देश में लागू नहीं हो गए हैं, बल्कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग गति से इन्हें अपनाया जा रहा है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को भविष्य में लाभ मिलने की उम्मीद है।
पहचान सत्यापन में डिजिटल बदलाव
नई व्यवस्था में पहचान की पुष्टि के लिए डिजिटल सत्यापन को प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ राज्यों में आधार कार्ड को संपत्ति लेनदेन से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, हालांकि यह अभी सभी राज्यों में अनिवार्य नहीं है। जहां डिजिटल सत्यापन लागू किया गया है, वहां खरीदार और विक्रेता दोनों की पहचान को सरकारी डेटाबेस से मिलान किया जाता है। इस प्रणाली का उद्देश्य नकली दस्तावेजों और धोखाधड़ी की घटनाओं को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण डिजिटल सत्यापन प्रणाली को पूरे देश में लागू करने में कुछ समय लगेगा, क्योंकि सभी राज्यों में तकनीकी बुनियादी ढांचा समान स्तर का नहीं है।
संपत्ति रजिस्ट्री के लिए आवश्यक दस्तावेज
संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए पारंपरिक दस्तावेजों की जरूरत बनी हुई है। पहचान के लिए आधार कार्ड या सरकारी पहचान पत्र आवश्यक है। कर उद्देश्यों के लिए पैन कार्ड अनिवार्य है। संपत्ति के स्वामित्व को साबित करने वाले दस्तावेज जैसे खाता-खतौनी, पुराने विलेख या टाइटल डीड की जरूरत होती है। पते के प्रमाण के रूप में बिजली या पानी का बिल स्वीकार किया जाता है। संपत्ति के मूल्यांकन और सर्किल रेट से संबंधित दस्तावेज भी जमा करने होते हैं। हालांकि विभिन्न राज्यों में दस्तावेजों की सूची में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय उप-पंजीयक कार्यालय से पुष्टि करना उचित रहता है।
ऑनलाइन सुविधाओं का विस्तार
कई राज्यों ने संपत्ति पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किए हैं, जिससे प्रारंभिक प्रक्रियाएं घर बैठे पूरी की जा सकती हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदन जमा करना, दस्तावेज अपलोड करना और शुल्क का भुगतान करना संभव हो गया है। हालांकि अधिकांश राज्यों में अंतिम पंजीकरण के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति अभी भी आवश्यक है। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का काम जारी है। भूलेख और स्वामित्व जैसे पोर्टल के माध्यम से लोग अपनी जमीन की जानकारी देख सकते हैं। यह व्यवस्था धीरे-धीरे पारदर्शिता बढ़ा रही है।
राज्यवार भिन्नताएं और कार्यान्वयन
चूंकि भूमि राज्य का विषय है, इसलिए पंजीकरण नियमों में राज्यवार अंतर है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे कुछ राज्य डिजिटल पंजीकरण में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ राज्य अभी भी पारंपरिक प्रणाली पर निर्भर हैं। हरियाणा और दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन दस्तावेज सत्यापन की पुरानी प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि एकसमान राष्ट्रीय प्रणाली बनाने में कुछ वर्ष लग सकते हैं। इसलिए नागरिकों को अपने राज्य के विशिष्ट नियमों की जानकारी रखनी चाहिए और स्थानीय अधिकारियों से परामर्श लेना चाहिए।
भविष्य की संभावनाएं और सुधार
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी भूमि पंजीकरण प्रणाली स्थापित करना है। इससे संपत्ति विवादों में कमी आने, कानूनी मामलों में तेजी आने और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बढ़ने की उम्मीद है। बायोमेट्रिक सत्यापन और वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी तकनीकों का प्रयोग कुछ राज्यों में परीक्षण चरण में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुधारों को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारतीय संपत्ति बाजार अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित हो सकता है। हालांकि, इसके लिए बेहतर तकनीकी बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।
अस्वीकरण: यह लेख 21 जनवरी 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक सरकारी स्रोतों पर आधारित है। भूमि पंजीकरण के नियम राज्यवार भिन्न हैं और समय के साथ बदल सकते हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी संपत्ति लेनदेन से पहले अपने राज्य के उप-पंजीयक कार्यालय, आधिकारिक सरकारी पोर्टल या योग्य कानूनी पेशेवरों से परामर्श अवश्य लें। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।


